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जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतुमे... ( जगन्नाथाष्टकम ) माँ शची ने देह त्याग दिया महाप्र…
प्रणामो दुःखशमनस्तं नमामि हरिं परम्... (श्रीमद्भागवत) ओह ! आज ये सब लिखते हुए अच्छा न…
शची नन्दन जय गौर हरि... (कृष्ण दास) नवद्वीप में आज प्रातः ही जगन्नाथपुरी से एक चैतन्य …
हा नाथ रमण प्रेष्ठ क्वासी क्वासि महाभुज… (श्रीमद्भागवत) शरीर सन्न पड़ जाता है… कँप कँपी…
निष्किंचनानां न वृणीत यावत्... (श्रीमद्भागवत) ओह ! इस विरह को मैं कैसे पचा पाउँगा । मे…
हरिं नरा भजन्ति तेतिदुस्तरम् तरन्ति ते... ( रामचरितमानस ) क्या हरिदास का शरीर छूट गया …
स्फुरतु नो शची नन्दनः... ( रूप गोस्वामी ) मैं यात्रा में हूँ… मधुबनी (बिहार) जा रहा हू…
श्चेतो कस्मान्मम निजपदे गाढ़मुप्त चकार... ( चैतन्य चन्द्रामृत ) प्रयागराज से चलते चलते …
कलौ तद् हरि कीर्तनाद्... ( श्री मद्भागवत ) साधकों ! क्या कारण है… मेरे साधक ऐसे ऐसे ह…
यन्मुहूर्तम् क्षणं वापि वासुदेवं न चिन्तयेद... ( भक्ति सुधा ) भावातिरेक नित बढ़ता ही जा…
पदापि युवतीभिक्षु न स्पर्शेद... ( श्रीमद्भागवत ) आज की बात कहूँ… उससे पहले मैं प्रयाग…
सब जग को यह माखन चोरा भेष धरयो वैरागी... ( मीरा बाई ) बृज भूमि में प्रवेश करते ही चैतन…