श्रीमहावाणी में ब्याहुला उत्सव || भाग 55
!! दोउ लालन ब्याह लड़ावौ री !!
( श्रीमहावाणी में ब्याहुला उत्सव )
!! अद्भुत झाँकी !!
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गतांक से आगे -
जै जै !
- आज निकुँज में सखियाँ जै जै कार कर रहीं थीं .....नृत्य और गायन भी कर रहीं थीं ....रसाक्रान्त हो ब्याहुला का पूर्ण आनन्द ले रहीं थीं । कि तभी प्रेम अपनी पराकाष्ठा में पहुँच गया । क्या हुआ ? हुआ ये कि सखियाँ उत्सव में खो गयीं , इधर श्याम सुन्दर को अवसर मिला और वे अपनी प्यारी को निहारने लगे ...अपलक , मानों त्राटक ही लग गया हो । अब श्याम सुन्दर ही निहार रहे हों ऐसा नही है ....लाड़ली जू भी उसी त्वरा से निहारने लगीं थीं । कि तभी दोनों बदलने लगे ....प्यारी जू गौर हैं और श्याम सुन्दर श्याम हैं ....एक दूसरे को देखते देखते ...ये एक दूसरे में ही खो गये और वही बन गये थे । प्यारी जू श्याम सुन्दर बन गयीं ...यानि उनका गौर वर्ण श्याम हो गया और श्याम सुन्दर का वर्ण गौर हो गया । ये देखते ही देखते हुआ था ।
सखियाँ जै जै कार करने में मग्न थीं ...नृत्य और गायन में ये सब डूबी हुईं थीं कि ...जब दोनों का रँग बदला तो ढंग भी बदल गया । हंसते हुए प्यारी जू ने अपने प्यारे को अपनी चूनर ओढ़ा दी और प्यारी को श्याम सुन्दर ने अपनी पीताम्बर । चंद्रिका श्याम ने धारण कर लिया और मुकुट प्यारी जू ने । लो जी ! प्रेम की पराकाष्ठा ...ये तो एक दूसरे में ऐसे खोए कि पूरे ही बदल गये....
“हरि बने भामिनी , भामिनी हरि बनीं”
जै हो !
!! दोहा !!
जै जै कहि सहचरी सबैं, अबै देहु सुख एह।
बना बनी गति अंक पुनि, निरखैं नैंनन नेह ।।
बना बनी की जोरि बर, बनी जु अद्भुत नीय।
हरिजु बनी श्रीभामिनी, भामिनि हरि जु बनीय ॥
॥ पद ॥
हरि बने भामिनी भामिनी हरि बनी जोरि अद्भुत बनी बना बनी की।
बिसदबर धाम वृंदाबिपन नित्य नव कुंज में केलि कमनीय नीकी ॥
मुकुट रचि मौर सिर मोहनी कें लसै मदनमोहन कें सिरमौरी सोहैं।
अंग छबि जगमगै कौन घन चंचला कामरति की कला कोटि मोहैं।
हार हिय लालकें बाल कें माल उर मौक्तिकी मंजु मनि पट सहाने।
अमल उद्योतकर आभरन हरन मन माधुरी मदन तन लहलहाने ॥
पीय को सुरँग उतरीय लै उमँग सों रंगदेवी रुचिर गाँठ जोरी।
चपल चखि चितवनी तिरछि करि अति लसी मंद मुसकै हँसी नवकिसोरी ॥
गारि गावैं सहेली सखी सहचरी सुंदरी सुरमिली टोल टोलैं।
नूत नवमंजरी चाखि मधुरितु मनो कंठ कल कोकिला बोल बोलें ॥
***********हे सखियों ! जै जैकार खूब हो गया ...नृत्य और गायन भी हो गया ...अब थोड़ा इन नव दम्पति पर भी ध्यान दो ....हितू सहचरी जू ने ये बात कही थी ....तो सब युगलवर की ओर देखने लगे .....किन्तु कुछ बदल गया है ...हरिप्रिया ने कहा । श्रीरँगदेवि जू बोलीं - सब कुछ बदल गया है । देखो तो श्याम सुन्दर भामिनी बने हैं ...और भामिनी प्रिया जी श्याम सुन्दर बन गयीं हैं ....ये कहते ही ....वहाँ से युगल दम्पति चले गये ....अब सखियाँ इधर उधर देख रहीं हैं .....दूर देखा तो उधर श्रीवन की शोभा विशेष खिल गयी हैं ...ये देखते ही सारी सखियाँ उस ओर चल दीं ....जब उस कुँज में गयीं तो चकित ! ये क्या हो गया था ....उस कुँज में विहार कर रहे थे ये दम्पति ....किन्तु दोनों बदल गये थे ......ये बात अब हरिप्रिया सखी ने स्पष्ट किया था ।
भाग तो हमारे हैं सखी ! कि ऐसी विलक्षण झाँकी को निहारने का अवसर हमें मिला है ।
कैसी विलक्षण झाँकी ! अहो ! श्याम सुन्दर जो हैं वो प्रिया जी हैं और प्रिया जी श्याम सुन्दर हैं ....ये एक दूसरे के रँग में रँग चुके हैं ....और एक दूसरे ही बन गये हैं । हंसती हैं हरिप्रिया ...तो अनन्त सखियाँ भी अपने आनन्द को छिपा नही पातीं ...और उनकी प्रसन्नता खिल जाती है । उन्मद होकर हंसती हैं ।
हरिप्रिया देख रहीं हैं ...और सभी सखियों को बता भी रहीं हैं ....देखो ! ये जो पुष्पों का चयन कर रहे हैं श्याम सुन्दर के भेष में , ये हमारी स्वामिनी जू हैं ...और जो इनके पीछे पीछे चल रहीं हैं प्रिया जू के भेष में , वो श्याम सुन्दर हैं ।
“ये दुलहा दुलहन तो बड़े ही रसीले हैं”.....अन्य सखियाँ अति आनन्द से बोलीं थीं ।
हरिप्रिया कहती हैं ...रसीले क्यों न होंगे ....ये रस से ही तो बने हैं । और विपरीत भेष धारण करके इन्होंने ये भी अब बता ही दिया है कि “रस केलि” अब उद्दाम खिलेगी । अरी सखियों ! अपने नयनों को सफल करो और इन दोउ लालन और लाड़ली के विपरीत रूप को निहारो । ये लाभ हमको ही प्राप्त है और किसी को नही । अपनी हरिप्रिया सखी जू की बात सुनकर सब सखियाँ भाव में डूब गयीं । ये झाँकी तो सच में अद्भुत थी ...श्याम सुन्दर ने चोली कसी थी और प्रिया जू ने श्याम सुन्दर का शाही पोशाक .....प्रिया जी का हार श्याम सुन्दर ने और श्याम सुन्दर की माला प्रिया जी ने । और बीच बीच में ये मुस्कुराते हुए भी जा रहे थे , जब मुस्कुराते , तब बिजली सी चमकती है .....चारों ओर आभा फैल जाती है । ये इतने सुंदर लग रहे हैं जिसकी कोई सीमा नही है ..कामदेव तो पहले ही मूर्छित पड़ा है और रति तो प्रिया जी की चरण किंकरी ही हो गयी थी ।
तभी - श्रीरंगदेवि जू हंसती हुयी आगे आयीं ..और श्याम सुन्दर की चूनर लेकर प्रिया जी के पीताम्बर से गठजोर कर दिया ..ये देखते ही सारी सखियाँ करतल ध्वनि करके उन्मद हो गयीं ।
तभी प्रिया जी की ओर टेढ़ी नज़र से श्याम सुन्दर ने देखा तो प्रिया जी जोर से हंसीं ....उनकी हंसी में माधुर्य सार था ....जिससे पूरा निकुँज ही मधुर रस में डूब गया ।
अब ये दोनों श्रीवन में भ्रमण करने लगे तो उनके पीछे सारी सखियाँ चल पड़ीं .....ये दोनों मुँह छिपाकर हंस रहे हैं ....प्रिया जी ने श्याम सुन्दर को लता की ओट में चूम लिया ...अब सखियाँ ये समझ नहीं पायीं कि ...चूमा किसने हैं ...प्यारी जी ने या प्यारे ने । अद्भुत ! इस बात को भी ये सखियाँ भूल गयीं कि दोनों बदल गए हैं ....तब ....हरिप्रिया सखी पीछे पीछे चलते हुए गारी सुनाने लगीं थीं तो पीछे चल रहीं अनन्त सखियाँ उसी गारी को दोहरा रहीं थीं ...क्या झाँकी थी ये ।
क्रमशः
Hari sharan
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