श्रीमहावाणी में ब्याहुला उत्सव || भाग 48
!! दोउ लालन ब्याह लड़ावौ री !!
( श्रीमहावाणी में ब्याहुला उत्सव )
!! सखियों द्वारा प्रिया जू का गुणगान !!
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गतांक से आगे -
॥ पद ॥
विद्युतबरनी हो मृगनैनी । रूप अनूपम सब सुखदैनी ॥
चंद्रवदन नैंना अनियारे, रतनारे मधि चंचल तारे।
अंजन मनरंजन रेखा-जुत गंजन कंजन खंजन गारे ॥
भौंह बनी नासा नकबेसरि अधर दसन रसना अरुनाई।
ठोड़ी गाड़ कपोल अलक अरु करन कुसुम कानन छबि छाई ।।
बरबेंदी बेंना अरु बेंनी मनहरि लैनी माँग सुहाई।
मोतिन-लर सोभासुन्दर सखि लखि लखि लोचन रहत लुभाई ॥
कंठाभरन उतंग कुचन पर कसी कंचुकी अतलस गाढ़ी।
बाजूबंध चूरी कंकन गजरा करपान सुछबि अति बाढ़ी ॥
अँगुरिन में मुंदरी मनि-मंडित नखन-पाँति करतली सुरंग।
उदर सुदेस सुबेस नाभि-सर बरनत अति मति होत जु पंग ॥
कटि किंकिनि लहँगा लहकारी सारी तनसुख जेहरि पायन।
पायल बिछिया नखन महावर अनवट गजगति चलत अदायन ।।
खाये पान मुसक्यात मनोहर जगमगाति नवजोवन जोति ।
अमित अनूप रूप श्रीहरिप्रिया चितै चखनि चकचौंधी होति ॥ १६८ ॥
******हे रसिकों ! इस महोत्सव में आप भी सम्मिलित होईये । अपने को यहीं कहीं निकुँज में खोजिए ...अपने को निकुँज की वीथिन में खोने दीजिए । होईये उन्मत्त और गाइये प्रिया जू के गुणगान को । बोलिए श्रीराधा ...और बाक़ी सब भूल जाइये ।
देखिए ! हरिप्रिया आदि सखियाँ कैसे दुलहन के भेष में विराजमान प्रिया जू को निहार रही हैं ....अष्ट सखियाँ भी इस आनन्द में इतनी माती हो गयीं कि वो सब आगे आकर ....घेरा बनाकर अपनी प्रिया जू के गुणगान में मग्न हो जाती हैं ।
हे विद्युत के समान वर्ण वाली , मृग नयनी , अनुपम रूप लावण्य से युक्त , सुख प्रदायनी प्रिया जू आपकी जय हो , जय हो जय हो । अष्ट सखियों ने पुष्प उछालते हुए वर्तुल में घूमकर जब अपनी स्वामिनी की जय जयकार की ....तब तो पूरा निकुँज ही जयजयकार करने लगा था ।
हे चंद्रमुखी ! एवम रतनारी ! ( लालिमा लिया मुख ) चंचल पुतरियों से युक्त तीखे नयन वाली हमारी स्वामिनी ! आपकी जय हो जय हो । अद्भुत दृश्य था वो तो ...सब जयजयकार कर रहे थे ...सब आनन्द में उल्लसित हो गये थे ।
हे सुख दायिनी ! खंजन नयन , और कज्जल नयन वाली ....सुन्दर भँवो वाली , और ये शुक के समान नासिका में नक बेसर पहन कर अपने प्रीतम को रिझाने वाली हमारी प्राणधन राधिके !, आपकी जय हो , जय हो ।
बारी बारी से सारी सखियाँ अपनी स्वामिनी के प्रति प्रेम-भाव व्यक्त कर रही हैं ...और करते हुए अत्यंत स्नेह युक्त हैं ये सब ।
हे सौन्दर्य की देवि ! हंसते हुए आपके कपोल में जो गड्डे पड़ जाते हैं ....जिसे देखकर हमारे सरकार मोहित हो उठते हैं ....घुंघराले आपके केश जिसमें मन मोहन का मन ही अटक जाता है ..ऐसी हमारी प्राण प्रिये ! आपकी जय हो जय हो ।
हे माधुर्य का साकार रूप ! आपकी वेणी , जिसे देखकर श्याम सुन्दर अपने हृदय को न्योछावर करने के लिए तत्पर रहते हैं .....आपके हृदय में पड़ी मोतियों की माला को देख देखकर हम सखियाँ फूली नही समाती हैं ...ऐसी हमारी सर्वेश्वरी ! आपकी जय हो जय हो ।
श्याम सुन्दर ने देखा सब सखियाँ प्रिया जी के ऊपर पुष्प डाल रही हैं ...और जयजयकार कर रही हैं ...तो हमारे दुलहा सरकार को भी इतना आनन्द आया कि वो भी पुष्प लेकर अपनी नयी नवेली दुल्हन के ऊपर डालने लगे ।
हे कंचन वर्णी ! आपके वक्षस्थल में जो कसी हुई कंचुकी है ...उसमें से झांक रहा आपका कंचन वदन ....जिसे देख देखकर काम को मोहित करने वाले स्वयं मोहित हो रहे हैं ....बाहों में बाजूबंद , हाथों चूड़ियाँ , आहा ! बालों में गजरा ....और आपकी पतली और लम्बी उँगलियों में अंगूठी आपकी शोभा को और बढ़ा रही है ....हे रतिरस वर्धिनि ! आपकी जय हो जय हो ।
हे रसिक रसीली ! आपका कृश उदर , और उसमें गम्भीर नाभि .....यही नाभि तो है जिस की गहराई स्वयं श्याम सुन्दर नही पा पा रहे । उनका मन मीन बनकर आपके नाभि सर में भ्रमण करता रहता है ...अनादि काल से कर रहा है ...किन्तु अभी तक थाह पाया नही है । हे छैल छबीली ! आपकी जय हो जय हो ।
हे गुण गर्विली ! आपके सौन्दर्य का बखान और कौन कर सकता है ....आपकी सुन्दर नीली साड़ी ....स्वर्ण समान अंग में कितनी शोभा दे रही है । हे श्यामा प्यारी ! आपकी नीली साड़ी देखकर तो ऐसा लगता है ....मानों आपने नील मणि श्याम सुन्दर को ही अपने अंगों में लपेट लिए है ...ऐसी हे श्रीकृष्ण प्रिये ! आपकी जय हो जय हो ।
तभी हरिप्रिया सखी आनन्द मग्न होकर प्रिया जी के चरणों में बैठ जाती हैं और बोलीं ...हे सखियों की हृदय स्वामिनी ! आपके ये चरण जो अत्यन्त सुकोमल हैं ....आहा ! बिछुआ , पायल , और लाल लाल महावर , ऐसे चरण हम सब सखियों के प्राण बनकर हृदय में बसे रहें । ये कहते हुए हरिप्रिया सखी उठकर एक पान प्रिया जू को खिलाती हैं ....सभी सखियाँ जयजयकार कर उठी हैं ...श्याम सुन्दर ललचा रहे हैं ...ये देखकर प्रिया के मुख से चर्वित पान लेकर लाल जू के मुख में डाल दिया हरिप्रिया ने । बस अब तो सब सखियाँ उछल कर आनन्दोन्मत्त हो उठीं ।
हे सखियों के जीवन धन युगलवर ! आपकी जय हो , जय हो , जय हो ।
पूरा निकुँज आनन्द सरिता में डूब गया था ।
क्रमशः
Hari sharan
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